#AImightyGodkabir
ऋग्वेद मंडल 9 सूक्त 96 मंत्र 17 में कहा है गया है कि कविर्देव शिशु रूप धारण कर लेता है लीला करता हुआ बड़ा होता है कविताओं द्वारा तत्वज्ञान वर्णन करने के कारण कवि की पदवी प्राप्त करता है अर्थात उसे ऋषि संत वे कवि कहने लग जाते हैं, वास्तव में वह पूर्ण परमात्मा कविर ( कबीर साहेब) ही है।