#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्यगीता जी के अध्याय 18 के श्लोक 66 में गीता ज्ञान दाता काल ने अपने से अन्य परम अक्षर ब्रह्म की शरण में जाने को कहा है।
#भगवदगीता_के_गूढ़_रहस्य📙गीता जी के अध्याय 18 के श्लोक 64 तथा अध्याय 15 के श्लोक 4 में स्पष्ट है कि स्वयं काल ब्रह्म कह रहा है कि हे अर्जुन! मेरा उपास्य देव (इष्ट) भी वही परमात्मा (पूर्ण ब्रह्म) ही है तथा मैं भी उसी की शरण हूँ तथा वही सनातन स्थान (सतलोक) ही मेरा परम धाम है। क्योंकि ब्रह्म भी वहीं (सतलोक) से निष्कासित है।