Kabir Prakat DKabir कबीर-राम रहीमा एक है, नाम धराया दोय।कहै कबीर दो नाम सुनि, भरम परो मति कोय।। कबीर प्रकट दिवस
14 जून कबीर प्रकट दिवस के उपलक्ष्य में जरूर जानें कबीर परमेश्वर का हिन्दू- मुस्लिम, सभी धर्मों को विशेष संदेश
कबीर साहेब जी को जनसाधारण, एक संत, कवि मानता है जब कि वे वास्तव में पूर्ण परमात्मा हैं
जो अपने ऋतधाम (सतलोक) से आकर, अपने सत्य ज्ञान का प्रचार शब्दों, दोहों, साखियों, कविताओं के माध्यम से करते हैं।
परमेश्वर कबीर साहेब सशरीर गुरु, संत या अवतार (संदेशवाहक) के रूप में आते हैं तथा कुछ समय संसार में मानव जैसा जीवन जीकर दिखाते हैं। उस समय चल रहे कुभक्ति मार्ग को अपने ज्ञान शब्द-साखियों के माध्यम से प्रमाणित करते हैं।
कबीर परमेश्वर सभी धर्मों के लोगों को संदेश देते हुए कहते हैं,
हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई, आपस में सब भाई-भाई।
आर्य-जैनी और बिश्नोई, एक प्रभु के बच्चे सोई।।
कबीर परमेश्वर ने कहा है कि, आप हिंदू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई, आर्य- बिश्नोई, जैनी आदि-आदि धर्मों में बंटे हुए हो। लेकिन सच तो यह है कि आप सब एक ही परमात्मा के बच्चे हो।
हिन्दू कहें मोहि राम पियारा, तुर्क कहें रहमाना।
आपस में दोउ लड़ी-लड़ी मुए, मरम न कोउ जाना।।
भावार्थ: परमेश्वर कबीर जी कहते हैं कि हिन्दू, राम के भक्त हैं और तुर्क (मुस्लिम) को रहमान प्यारा है। इसी बात पर दोनों लड़-लड़ कर मौत के मुंह में जा पहुंचे, तब भी दोनों में से कोई सच को न जान पाया।
हिन्दू मुस्लिम दोनों भुलाने, खटपट मांय रिया अटकी |
जोगी जंगम शेख सेवड़ा, लालच मांय रिया भटकी।।
भावार्थ- हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही आज ईश्वर-पथ से भटक गए हैं, क्योंकि इन्हें कोई सही रास्ता बताने वाला नहीं है। पंडित, मौलवी, योगी और फ़क़ीर सब सांसारिक मोह-माया और धन के लालच में फंसे हुए हैं। वास्तविक ईश्वर-पथ का ज्ञान जब उन्हें खुद ही नहीं है तो वो आम लोगों को क्या कराएंगे।
जब कि वास्तव में,
"जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा,
हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, धर्म नहीं कोई न्यारा।।"
हम सभी की जीव जाति है यानी हम सभी परमात्मा की प्यारी जीव आत्माएं है और सर्व प्रथम हमारा मानव धर्म ही सबसे बड़ा धर्म है। चाहे आज हम तत्वज्ञान के अभाव में अज्ञानता वश किसी भी जाति या धर्म में क्यों ना बंटे हुए हो। वास्तव में हम सभी एक ही परमात्मा के बच्चे हैं।
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